नमस्कार दोस्तों, मेरा नाम रोहन सिंह है। मैं गुड़गांव में रहता हूँ और मेरा लंड 7 इंच से थोड़ा ऊपर है। सेक्स करने का मुझे बहुत शौक है और चूतों के इंतजार में मेरा लौड़ा झांटें बिछाए खड़ा रहता है।
आप ये कहानी desivasna पर पढ़ रहे हैं |
मैं एक जाटनी आंटी की बिल्डिंग में किराए पर रहता था। ये वही आंटी हैं जिनकी बिल्डिंग में मैंने पहले रेखा आंटी की चुदाई की थी। आंटी की उम्र 56-57 साल के करीब थी। उनके पति की मौत हो चुकी थी। घर में आंटी, उनकी सास, एक बेटा और एक बेटी थी। उनकी सबसे छोटी बेटी नेहा अभी 19 साल की हुई थी।
रेखा आंटी बिहार चली गई थी। पिछले 20 दिनों से मुझे चूत के दर्शन भी नहीं हुए थे। मेरा मन बहुत ज्यादा चूत मारने का हो रहा था।
एक दिन बिल्डिंग का किराया वसूलने के लिए आंटी की बेटी नेहा आई। वो बोली कि मम्मी ने कहा है कि रोहन भैया के साथ मिलकर किराया इकट्ठा कर लो। मैंने कहा ठीक है, अभी चाय बना रहा हूँ, तुम भी पीओगी? नेहा बोली ठीक है और मेरे रूम में बैठ गई।
आप ये कहानी desivasna पर पढ़ रहे हैं |
हम दोनों चाय पीने लगे। नेहा की आँखें शरारत भरी थीं, होंठ गुलाबी थे और उसके बदन से हल्की सेक्सी खुशबू आ रही थी। उसके बाद हम बिल्डिंग में किराया वसूलने निकले। आधे मर्द ड्यूटी पर थे, उनकी बीवियाँ बोलीं शाम को आ जाना।
किराया वसूलकर नेहा पैसे लेकर चली गई। मैं रूम में लेटा ही था कि रेखा आंटी का फोन आ गया। उन्होंने बताया कि वो 15 दिन और नहीं आ पाएंगी। आंटी की मीठी आवाज सुनकर मेरा लंड खड़ा हो गया। मैं लंड सहलाते हुए उनसे बात करने लगा।
फोन रखने के बाद मेरे मन में नेहा के खयाल आने लगे। मैं नेहा को बिस्तर पर लाने के बारे में सोचते हुए मुठ मारकर शांत हुआ।
कुछ देर बाद दरवाजा खटखटाया। नेहा खड़ी थी। बोली मम्मी ने नीचे बुलाया है। मैं उसके साथ गया। आंटी बोलीं कि वो रोहतक जा रही हैं क्योंकि बड़ी बेटी की तबियत खराब है। उन्होंने मुझसे 15000 रुपये माँगे। मैंने 20 हजार रुपये दे दिए। आंटी को ऑटो में बैठाकर विदा किया।
मैं अंदर ही अंदर बहुत खुश था। नेहा पर लाइन मारने का अच्छा मौका मिल गया था। शाम को नेहा फिर आई और हम किराया वसूलने गए।
आप ये कहानी desivasna पर पढ़ रहे हैं |
सीढ़ियों पर कई बार बहाने से मेरा हाथ उसकी मुलायम गांड से टच हो गया। वो कुछ नहीं बोली। अचानक लाइट चली गई। नेहा डर गई और मुझसे सटकर मेरा हाथ पकड़ लिया। अंधेरे में मेरा हाथ उसकी चूचियों के पास पहुँच गया। मैंने हिम्मत करके उसकी चूची दबाई। उसने भी बहाने से मेरे खड़े लंड को छू लिया।
लाइट आने के बाद नीचे आए। उसकी दादी सो चुकी थी। नेहा बोली, “रोहन भैया, आज रात तुम नीचे ही सो जाओ ना, मुझे अकेली डर लग रहा है।”
मैंने तुरंत हाँ कर दी। मैं खाना खाकर आया। फिर से लाइट चली गई। नेहा मेरे करीब आ गई। मैंने उसे बाहों में भर लिया और जोरदार किसिंग शुरू कर दी। उसने भी पूरी तरह साथ दिया।
मैंने उसकी टी-शर्ट ऊपर की, ब्रा खोली और उसके नरम गोल चूचों को चूसने लगा। नेहा सिसकारियाँ भरने लगी। मैंने उसकी सलवार उतारी, पैंटी हटाई और उसकी गुलाबी चूत को उंगली करने लगा। वो तड़प रही थी।
“बिहारी… भोसड़ी वाले… जल्दी अपना लौड़ा डाल… मेरी चूत में आग लगी है,” वो हाँफते हुए बोली।
मैंने कॉन्डोम चढ़ाया और एक जोरदार झटके से पूरा 7 इंच का लंड उसकी टाइट चूत में घुसा दिया। नेहा चीख उठी — “आह्ह… मम्मी… फाड़ दी तूने मेरी… बहुत मोटा है!”
धीरे-धीरे दर्द कम हुआ और मैंने ताबड़तोड़ चुदाई शुरू कर दी। नेहा भी अपनी गांड उठा-उठाकर जवाब देने लगी। बाद में वो खुद मेरे ऊपर चढ़ गई और मेरे लंड पर कूद-कूदकर चुदवाने लगी। पूरा कमरा चप-चप और फच-फच की आवाजों से गूंज रहा था।
उस रात मैंने उसे दो बार चोदा।
अगले दिन मेरी छुट्टी थी। मैं बेड पर लेटा लंड सहला रहा था। गेट खुला था। नेहा चुपके से अंदर आ गई और मेरे लंड को मुंह में ले लिया। वो खूब चूसने लगी। फिर मैंने उसे नंगा किया, उसकी चूत चाटी और फिर जोरदार चुदाई की।
नेहा पूरी रंडी बन गई थी। वो कहती थी, “बिहारी लंड का मजा ही कुछ और है।”
इस तरह मकान मालकिन आंटी की जवान बेटी नेहा की टाइट जाटनी चूत में मैंने अपना बिहारी लंड बार-बार पेला और खूब मजा लिया।
Read More Story
1. Desi Chachi Hindi Sex Story
2. Bhabhi Devar Hindi sex Story
3. Chachi ki chudai
4. Padosan ki chudai
5. Jawan ladki ki chudai