दोस्तों ये मेरी वो सच्ची घटना है जिसे मैं लंबे समय से अपने दिल में छुपाकर रखना चाहता था पर आज मैं आपको इस देसी हिंदी सेक्स कहानी में पूरी ईमानदारी से बता रहा हूं कि कैसे 23 साल की मकान मालकिन प्रिया के साथ मेरी जिंदगी का सबसे हॉट और रोमांटिक सफर शुरू हुआ मैं राहुल हूं और जब मैं अपनी पढ़ाई पूरी करके अपने शहर को छोड़कर नए शहर जयपुर में आया था तो मैं 2 साल तक एक पुराने किराए के घर में रहता रहा फिर मुझे एक और घर का पता चला जहां सिर्फ एक विधवा महिला अपने 10 महीने के बच्चे के साथ रहती थी वो घर मेरे ऑफिस से भी काफी पास था इसलिए मैं एक दिन उस घर को देखने के लिए गया जब मैंने दरवाजे पर घंटी बजाई तो एक सिंपल सी साड़ी पहने खूबसूरत जवान लड़की ने दरवाजा खोला मैंने उससे कहा कि मैं घर देखने आया हूं और मकान मालकिन से मिलना चाहता हूं तो उसने मुस्कुराते हुए बोला कि वो खुद मकान मालकिन है यह बात सुनकर मुझे एक जोरदार झटका लगा क्योंकि उसे देखकर बिल्कुल भी लग नहीं रहा था कि उसकी शादी हो चुकी है और वो एक 10 महीने के बच्चे की मां भी है मेरी तो बोलती ही बंद हो गई थी उसकी गोरी रंगत उसकी बड़ी बड़ी आंखें और साड़ी में लिपटी उसकी आकर्षक देह देखकर मेरा मन ही नहीं माना था।
फिर मैंने खुद को संभाला और उसके साथ घर देखने लगा घर बहुत अच्छा और आरामदायक था इसीलिए मैंने बिना ज्यादा सोचे सोचे उसे एक साल का किराया एडवांस में दे दिया फिर वहां से लौटकर उस रात को मैं उस लड़की के बारे में सोच सोच कर सो नहीं पाया और उसका नाम प्रिया था वो दिखने में बहुत सुंदर थी और उसका रंग गोरा था उसकी उम्र 23 साल थी लेकिन उसके पति का स्वर्गवास 9 महीने पहले ही हो चुका था फिर 2 दिन बाद मैं उस घर में शिफ्ट हो गया पहले तो वो मुझसे जब भी बात करती थी तो सर पर पल्लू लेकर ही बात करती थी फिर धीरे धीरे वो मुझसे बिना पल्लू लिए ही बात करने लगी और मैं हर दिन की तरह अपने काम के कारण बहुत व्यस्त होता था लेकिन उसके साथ बात करने का मन बार बार करता रहता था उसकी मुस्कान और उसकी नजरें मुझे हर वक्त याद आती थीं।
फिर 2 महीने बाद एक दिन रात को मैं अपने रूम में बैठकर अपने लैपटॉप पर कुछ काम कर रहा था कि मेरे घर के दरवाजे की घंटी बजने लगी और मैंने घड़ी की तरफ देखा तो रात के 2.15 बजे हुए थे तो मैंने दरवाजा खोला तो देखा कि प्रिया बाहर खड़ी थी और वो बहुत घबराई हुई थी तो मैंने उसे अंदर आने के लिए कहा तो उसने कहा प्लीज आप मेरे साथ चलिए फिर मैं बिना कुछ बोले उसके साथ चला गया और जाते ही उसने बताया कि उसकी बेटी की तबीयत बहुत खराब है और वो बेहोश हो गई है फिर मैंने उससे पूछा कि क्या हुआ था तो उसने बताया कि कुछ दिनों से उसकी बेटी को बहुत तेज बुखार था फिर मैंने उसे कहा कि आप मेरे साथ इसी समय अस्पताल चलिए और मैंने अपनी गाड़ी बाहर निकाली और मैं उन दोनों को लेकर जल्दी से अस्पताल पहुंच गया वहां मैंने बहुत मुश्किल से डॉक्टर को बच्ची दिखाई।
डॉक्टर ने उसे देखा और बोला कि इसे ज्यादा सर्दी के कारण निमोनिया हो गया है और उसने उस बच्ची को तुरंत आईसीयू में भर्ती करवाया और उसका इलाज शुरू कर दिया पूरी रात मैं और प्रिया आईसीयू में रहे फिर सुबह 8.30 बजे जाकर उस बच्ची को होश आया और उसके बाद 2 दिन तक हम वहां पर रहे और मैंने भी ऑफिस से छुट्टी ले ली थी फिर हम तीसरे दिन बच्ची को घर लाए और घर आते ही मैंने मां और बेटी को उनके घर में छोड़कर अपने घर जाने लगा तो प्रिया ने मुझे रोका और वो मेरे पैरों पर गिरकर रोने लगी मुझे बड़ा अजीब सा लगा और मैंने उसे बार बार उठने को कहा लेकिन वो नहीं उठी तो मजबूरन मुझे उसे उठाना पड़ा फिर उसने कहा कि मैं आपका एहसान कभी नहीं भूल सकती अगर आज आप नहीं होते तो पता नहीं मेरी बच्ची का क्या होता भगवान ने आपको हमारे लिए फरिश्ता बनाकर भेजा है तो मैंने कहा कि मैं कोई फरिश्ता नहीं हूं अगर आपकी जगह कोई भी होता तो मैं उसकी मदद जरूर करता प्लीज आप रोइए मत और अपनी बेटी के साथ कुछ देर आराम कर लीजिए मैं अभी चलता हूं फिर आऊंगा और अगर कुछ भी जरूरत हो तो मुझे बुला लीजिएगा इतना कहकर मैं वहां से चला गया लेकिन उसके आंसू और उसकी कृतज्ञता ने मेरे दिल को छू लिया था।
फिर मैं रोज ऑफिस से आते ही उनके घर जाकर उनका हालचाल पूछता था और फिर कुछ दिनों बाद उस बच्ची की तबीयत ठीक हो गई और मेरा वहां पर आना जाना भी कम हो गया एक दिन मैं ऑफिस आया तो मुझे पास ही के एक गार्डन में प्रिया और उसकी बच्ची मिली तो प्रिया ने मुझसे कहा कि आप तो हमें भूल गए हैं अब तो आप घर भी नहीं आते फिर मैंने कहा कि ऐसी कोई बात नहीं है मैं कुछ दिनों से थोड़ा काम में व्यस्त था तो प्रिया ने कहा कि आप चेंज करके मेरे घर पर आइए हम साथ बैठकर चाय पीएंगे पहले तो मैंने मना किया और फिर बाद में प्रिया ने बहुत जिद की तो मैं मान गया और मैं उसके घर पर गया फिर उसने हम दोनों के लिए चाय बनाई और वो साथ में खाने के लिए कुछ नमकीन भी लाई चाय पीते पीते मैंने उससे पूछा कि इतने बड़े घर में वो अकेली कैसे घर में और कोई नहीं है क्या।
तो उसने बताया कि मेरी लव मैरिज हुई थी और मेरे पति एक प्राइवेट कंपनी में सेल्स मैनेजर थे और उनका इस दुनिया में कोई था यह उनके दादाजी का बंगला है उनके माता पिता की बचपन में ही मृत्यु हो गई थी तो वो अपने दादाजी के साथ ही रहते थे हम दोनों कॉलेज में एक साथ पढ़ते थे और मेरे पति का नाम हर्ष था जब हर्ष की नौकरी लगी तो वो मेरा हाथ मांगने मेरे घर गए लेकिन उन्हें अनाथ कहकर मेरे पापा ने हमारी शादी करने से मना कर दिया फिर हम दोनों ने घर से भागकर शादी की तो मेरे घर वालों ने उस दिन से हमसे रिश्ता तोड़ दिया और मैं अहमदाबाद की रहने वाली हूं फिर एक दिन एक कार एक्सीडेंट में मेरे पति की मौत हो गई तब हर्ष के दादाजी जिंदा थे लेकिन हर्ष के जाने के बाद उनको भी हार्ट अटैक आया और वो भी 6 महीने पहले गुजर गए और उनके जाने के बाद इस घर में सिर्फ मैं और मेरी 9 महीने की बेटी ही रह गए फिर घर खर्च चलाने के लिए मैं नौकरी करना चाहती थी लेकिन अभी मेरी बेटी छोटी है तो उसके लिए मुझे घर में रहना होगा फिर यह बात सोचकर मैंने घर का एक हिस्सा किराए पर देने का सोचा और आप आ गए लगता है फिर हमारी बातें बढ़ती गईं मैंने उसे गले लगा लिया वो भी मेरे सीने से लग गई हम दोनों के होंठ मिल गए मेरा लौड़ा एकदम तना हुआ खड़ा हो गया मैंने उसकी चुत को सहलाया और उसे चोदने की तड़प महसूस हुई वो चुदक्कड़ बन गई और बोली मुझे चुदवाने दो मैं चुदाई के लिए तैयार हूं मैंने अपना लंड उसकी चुत में घुसाया और जोर जोर से चोदते हुए उसे पूरा मजा दिया वो चुदवाती रही और लौड़े को अंदर लेती रही हमारी चुदाई रात भर चलती रही मैं बार बार अपना लण्ड उसकी चुत में चोदता रहा और वो चुदाई का आनंद लेती रही आखिर में हम दोनों थककर एक दूसरे की बाहों में सो गए और उसके बाद हमारी चुदाई रोज होने लगी ये थी मेरी 23 साल की मकान मालकिन के साथ की सच्ची चुदाई वाली कहानी।
दोस्तों ये मेरी अपनी सच्ची रोमांटिक कहानी है अगर आपको पसंद आई तो कमेंट करके जरूर बताना।