दोस्तों, ये कहानी थोड़ी अलग और ज्यादा फैंटसी वाली है। नाम है अर्जुन, उम्र 23 साल। मेरा बड़ा भाई कर्नल विक्रम सिंह आर्मी में है। वो बॉर्डर पर पोस्टेड है, साल में सिर्फ 15-20 दिन ही घर आ पाते हैं। घर में मैं, मेरी भाभी प्रिया और मम्मी-पापा रहते हैं।
प्रिया भाभी की उम्र 29 साल है। उनका फिगर 38-28-40 का है। गोरी, लंबी, घने काले बाल, भारी-भरकम गांड और 38 साइज के दूध जैसे बूब्स। जब वो साड़ी पहनकर चलती हैं तो उनकी गांड लहराती है, देखने वाला लंड खड़ा किए बिना नहीं रह सकता।
भाई के आर्मी में होने की वजह से भाभी अक्सर अकेली और सेक्स की भूखी रहती थीं। मैं ये बात भाँप चुका था।
एक रात बारिश बहुत तेज हो रही थी। बिजली चली गई। पूरा घर अंधेरे में था। मम्मी-पापा नीचे वाले कमरे में सो रहे थे। भाभी ऊपर अपने बेडरूम में अकेली थीं।
मैं छत से पानी टपकने का बहाना बनाकर ऊपर गया। भाभी ने दरवाजा खोला। वो सिर्फ एक हल्की सी क्रीम कलर की नाइट सूट में थीं। बारिश की ठंड के कारण उनके निप्पल सख्त होकर सूट पर साफ उभर रहे थे।
“भाभी, छत से पानी टपक रहा है,” मैंने कहा।
भाभी ने अंदर आने को कहा। कमरे में सिर्फ मोबाइल की टॉर्च जल रही थी। हल्का-हल्का रोशनी में भाभी और भी खतरनाक लग रही थीं।
मैंने अचानक उनका हाथ पकड़ लिया और बोला, “भाभी, भैया 6 महीने से घर नहीं आए… आप कितने दिनों से तरस रही हैं?”
भाभी चौंक गईं, लेकिन हाथ नहीं छुड़ाया। उनकी सांसें तेज हो गईं।
मैंने हिम्मत करके उन्हें दीवार से सटा दिया और सीधे उनके होंठों पर हमला कर दिया। भाभी पहले 10-15 सेकंड तक विरोध करती रहीं, फिर अचानक पिघल गईं। उन्होंने मेरी गर्दन पकड़ ली और जोर-जोर से किस करने लगीं। उनकी जीभ मेरे मुंह में घुस गई।
मैंने उनका नाइट सूट ऊपर किया। भाभी ने ब्रा नहीं पहनी थी। उनके विशाल 38 साइज के बूब्स बाहर आ गए। मैंने एक बूब मुंह में ले लिया और इतनी जोर से चूसा कि भाभी चीख पड़ीं — “आह्ह्ह अर्जुन… धीरे… काट मत दो… आह्ह्ह!”
फिर मैंने उन्हें बेड पर पटक दिया। उनकी पैंटी खींचकर उतारी। भाभी की चूत बिल्कुल साफ और पहले से ही रस से लबालब थी। मैंने घुटनों के बल बैठकर उनकी चूत चाटनी शुरू कर दी।
भाभी पागल हो गईं। दोनों हाथों से मेरे सिर को अपनी चूत में दबाए जा रही थीं — “आआह्ह… अर्जुन… चाटो… अपनी भाभी की चूत चाटो… हां देवर… जीभ अंदर डालो… आह्ह्ह… मैं 6 महीने से सूखी हूँ… चाटो जोर से!”
मैंने 10 मिनट तक उनकी चूत चाटी। भाभी दो बार झड़ चुकी थीं।
फिर मैंने अपना 8 इंच का मोटा, खड़ा लंड निकाला। भाभी ने देखा तो उनकी आँखें चमक उठीं।
“अर्जुन… इतना बड़ा… भैया का तो इससे छोटा है…”
मैंने भाभी के पैर कंधों पर रखे और एक ही झटके में पूरा लंड उनकी चूत में घुसा दिया। भाभी जोर से चीख पड़ीं — “मर गई… फट गई मेरी चूत… आह्ह्ह!”
लेकिन 1 मिनट बाद वो खुद कमर हिलाने लगीं। मैं तेज-तेज धक्के मारने लगा। पूरा बेड हिल रहा था। “पच-पच-पच” की आवाज कमरे में गूंज रही थी।
भाभी चिल्ला रही थीं — “हां अर्जुन… जोर से चोदो… फाड़ दो अपनी भाभी की चूत… भैया की जगह तुम चोदोगे अब… आह्ह्ह… और तेज… मैं तुम्हारी रंडी हूँ देवर… चोदो मुझे… पूरी रात चोदो!”
मैंने भाभी को तीन पोजीशन में चोदा — मिशनरी, डॉगी स्टाइल (उनकी मोटी गांड पकड़कर), और अंत में भाभी ऊपर चढ़कर घुड़सवारी वाली स्टाइल में। भाभी चार बार झड़ गईं।
आखिर में मैंने उनकी चूत के अंदर ही गरम माल झाड़ दिया। भाभी ने मुझे कसकर गले लगाया और बोलीं, “अब से जब भी भैया आर्मी में होंगे, ये कमरा हमारा फक्किंग रूम रहेगा।”
उस रात के बाद तो हमारी रोज चुदाई शुरू हो गई।
- सुबह भाभी मुझे चाय देने आतीं तो मैं उन्हें बेड पर पटक के चोदता।
- दोपहर में जब मम्मी-पापा सोते, भाभी मेरे कमरे में आकर चुपके से लंड चूसतीं।
- रात को भाभी का बेडरूम हमारा मुख्य चुदाई स्थल बन गया।
भाभी अब पूरी तरह मेरी हो चुकी हैं। वो कहती हैं — “भैया तो सिर्फ नाम के पति हैं… असली पति तो तू है अर्जुन… जो मेरी चूत और गांड दोनों की प्यास बुझाता है।”
अब जब भैया छुट्टी पर आते हैं तो भाभी उनके सामने सीधी-सादी बन जाती हैं, लेकिन जैसे ही भैया वापस जाते हैं, भाभी मुझे मैसेज करती हैं — “देवर जी… आज रात तुम्हारी भाभी की चूत और गांड दोनों खाली हैं… जल्दी आओ और भर दो