दोस्तों ये मेरी वो सच्ची देसी xxx कहानी है जो मैं हमेशा अपने दिल में दबाकर रखना चाहता था पर आज मैं आपको अपनी xxx mom सेक्स कहानी बता रहा हूँ जो मेरी जिंदगी का सबसे गर्म किस्सा है।
मेरा नाम राहुल है और मैं मध्य प्रदेश के एक छोटे से गांव में रहता हूँ।
जब मैं दस साल का था तभी मेरी असली माँ चल बसीं और पिताजी ने बाईस साल की एक गरीब लड़की से दूसरी शादी कर ली।
हम लोग खेती और छोटी सी किराने की दुकान से अपना गुजारा करते थे।
मेरी ज्यादा पढ़ाई नहीं हुई इसलिए पिताजी ने दुकान संभालने का काम मुझे सौंप दिया।
जब मैं उन्नीस साल का हुआ तो पिताजी का अचानक देहांत हो गया।
अब घर में सिर्फ मैं और मेरी सौतेली माँ सरला रह गए थे।
मैं उन्हें माँ ही कहकर बुलाता था और वो मुझे बहुत प्यार करती थीं।
मेरी माँ सरला थोड़ी मोटी और सांवली रंग की थीं उनकी उम्र इकतीस साल थी।
उनके चूतड़ काफी बड़े और मुलायम थे जब वो चलतीं तो उनके चूतड़ हिलते नजर आते।
उनके बूब्स भी बड़े बड़े थे और मैंने कई बार नहाते वक्त उनके बूब्स को देखा था।
पिताजी के जाने के बाद हम दोनों अकेले महसूस करते थे।
खेतों को हमने दूसरे को दे दिया था ताकि दुकान संभाल सकें।
मैं सुबह सात बजे दुकान खोलता और दोपहर तक बैठता फिर घर आकर आराम करता।
शाम को फिर दुकान खोलकर रात सात बजे बंद करता।
एक दिन दोपहर के खाने के वक्त माँ ने मुझसे कहा राहुल बेटा अगर तुम्हें कोई ऐतराज न हो तो क्या मैं अपनी माँ को यहां बुला लूं क्योंकि वो भी अकेली रहती हैं।
उनके आने से हमारा अकेलापन कम हो जाएगा।
मैंने तुरंत हां कह दिया कोई बात नहीं माँ आप नानी जी को बुला लो।
अगले हफ्ते नानी जी शांति हमारे घर आ गईं।
वो पैंतालीस साल की थीं और उनके पति का तीन साल पहले देहांत हो चुका था।
नानी भी मोटी और सांवली थीं उनका बदन देखकर कोई भी उत्तेजित हो सकता था।
जाड़ों का मौसम था इसलिए दुकान देर से खुलती और जल्दी बंद होती।
घर पर माँ और नानी दोनों साड़ी ब्लाउज पहनकर रहती थीं और रात को सोते वक्त सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट में सोती थीं।
मैं भी लुंगी और अंडरवियर पहनकर सोता था।
एक सुबह मेरी आंख खुली तो नानी मेरे कमरे में खड़ी थीं और मेरी लुंगी की तरफ घूर रही थीं।
मैंने तुरंत आंखें बंद कर लीं ताकि वो सोचे कि मैं सो रहा हूँ।
मेरा लंड पूरी तरह खड़ा हो चुका था और अंडरवियर से बाहर झांक रहा था।
लुंगी थोड़ी सरक गई थी इसलिए मेरा आठ इंच लंबा मोटा लंड नानी को साफ दिख रहा था।
नानी उसे देखकर आंखें फाड़े हुए थीं।
कुछ देर बाद वो कमरे से चली गईं।
तब मैं उठा और लंड को अंदर किया लुंगी ठीक की और मुतने चला गया।
नहा धोकर जब हम नाश्ता कर रहे थे तो नानी बार बार मेरे लंड की तरफ देख रही थीं।
शायद वो फिर से उसके दर्शन चाहती थीं।
बाहर छोटा सा पार्टीशन था जहां हम पेशाब करते थे।
मैं धूप में बैठा था तभी नानी आईं और पेशाब करने चली गईं।
उन्होंने साड़ी और पेटीकोट कमर तक ऊपर किया और बैठ गईं।
नानी की काली फांकों वाली झांटों से घिरी चूत मुझे पूरी साफ दिख रही थी।
नानी का सिर नीचे था और मैं उनकी चूत को घूर रहा था।
पेशाब करके वो पांच मिनट उसी तरह बैठी रहीं और दाहिने हाथ से अपनी चुत रगड़ रही थीं।
ये देखकर मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया।
जब नानी उठीं तो मैंने नजर घुमा ली।
मेरे पास से गुजरते हुए नानी ने पूछा आज दुकान नहीं खोलनी क्या।
मैंने कहा बस नानी जी दस मिनट में खोलता हूँ।
शाम को घर आते ही नानी फिर पेशाब करने गईं और वही सब दोहराया।
मैं बाहर घूमने निकल गया।
माँ ने कहा बेटा जल्दी आना जाड़ा है।
रास्ते में मेरे दिमाग में सिर्फ नानी की चूत घूम रही थी।
मैंने ठेके पर डेढ़ पौवा देसी शराब पी ली।
घर लौटते वक्त नशा चढ़ चुका था।
रात नौ बजे हम सबने साथ खाना खाया।
खाने के बाद नानी और माँ सोने चली गईं।
मैं भी लुंगी पहने अपने कमरे में गया लेकिन नींद नहीं आ रही थी।
नशे में मेरा लंड तना हुआ था।
मैं चुपके से नानी के कमरे की तरफ गया।
नानी सो रही थीं उनकी साड़ी ऊपर खिसक गई थी और पेटीकोट में उनकी चुत की आउटलाइन दिख रही थी।
मैंने हिम्मत करके उनके पास बैठ गया।
धीरे से उनका पेटीकोट ऊपर किया।
नानी की चुत बिल्कुल नंगी थी।
मैंने अपनी उंगली से उनकी चुत को छुआ।
नानी की सांसें तेज हो गईं लेकिन आंखें बंद थीं।
मैंने सोचा आज तो चुदाई होकर रहेगी।
मैंने अपना लंड बाहर निकाला और नानी की चुत पर रगड़ने लगा।
नानी ने आंखें खोलीं और मुस्कुरा दीं।
उन्होंने कहा राहुल बेटा तुम भी मेरे लौड़े के दीवाने हो गए हो।
मैंने कहा नानी जी मैं तो आपकी चुत चोदने का सपना देखता था।
नानी ने मेरे लंड को हाथ में लिया और बोलीं इतना मोटा लंड तो मैंने कभी नहीं देखा।
फिर नानी ने मुझे चूम लिया और कहा चोद दो अपनी नानी की चुत।
मैंने तुरंत अपना लंड उनकी चुत में ठेल दिया।
नानी चीख पड़ीं लेकिन मजे से।
मैं जोर जोर से चोदने लगा।
नानी चुदवाती हुई कह रही थीं राहुल तेज चोदो मेरी चुत को फाड़ दो।
हम दोनों चुदक्कड़ बन गए थे।
मैं उनकी चुत में लंड घुसाता और चोदते हुए उनके बूब्स दबाता।
नानी चुदवाने में माहिर थीं।
उन्होंने अपनी टांगें फैला दीं और बोलीं पूरा लंड डाल दो।
मैं चुदाई करते हुए उनका लंड चूसने लगा।
फिर नानी ने मुझे ऊपर लिटाया और मेरे लंड पर सवार हो गईं।
वो चुदाई करते हुए उछल रही थीं।
मेरी चुदाई नानी को बहुत पसंद आई।
तभी माँ सरला कमरे में आ गईं।
वो सब देख रही थीं।
मैं डर गया लेकिन नानी ने कहा सरला बेटी तुम भी आ जाओ।
माँ ने मुस्कुराते हुए कहा मैं तो पहले से जानती थी राहुल का लंड कितना बड़ा है।
माँ ने अपना ब्लाउज उतारा और पेटीकोट खोल दिया।
अब दोनों माँ और नानी नंगी थीं।
मैंने माँ की चुत को चाटना शुरू किया।
माँ चुदवाती हुई कह रही थीं बेटा मेरी चुत को चोद दो।
मैंने माँ को चोदा और नानी को चोदते हुए दोनों को संभाला।
हम तीनों चुदाई में मस्त थे।
मैं अपनी सौतेली माँ की चुत में लंड डालकर जोर जोर से चोद रहा था।
नानी मेरे लंड को चूस रही थीं।
ये चुदाई रात भर चलती रही।
मैंने दोनों की चुत में अपना लंड घुसाया और चोदते चोदते झड़ गया।
माँ और नानी दोनों चुदक्कड़ बनकर मजे ले रही थीं।
उसके बाद से हम तीनों रोज चुदाई करते।
दिन में दुकान बंद करके घर आता तो दोनों मुझसे चुदवाने को तैयार रहतीं।
कभी माँ की चुत चोदता कभी नानी की लण्ड चूसवाता।
ये चुदाई का सिलसिला महीनों चला।
मेरी सौतेली माँ और उनकी माँ दोनों मेरी चुदाई की दीवानी हो गई थीं।
हम गांव में छुपकर ये सब करते लेकिन रात को कमरे में पूरा मस्ती करते।
एक बार नानी ने कहा राहुल तू तो हम दोनों को चोद चोद कर थका देता है।
मैंने कहा नानी जी आपकी चुत तो अभी भी टाइट है।
फिर हम तीनों ने एक साथ चुदाई की।
मैं माँ की चुत चोद रहा था और नानी मेरे लंड को सहला रही थी।
चुदाई के बाद हम थककर सो जाते।
ये थी मेरी जिंदगी की सबसे गर्म चुदाई वाली कहानी।
दोस्तों ये मेरी अपनी सच्ची कहानी है अगर आपको पसंद आई तो कमेंट करके जरूर बताना।