मेरा नाम अमित है, लखनऊ का रहने वाला। अभी जयपुर में जॉब कर रहा हूँ। तैयार हो जाओ, क्योंकि ये वो सच्ची कहानी है जिसे मैं हमेशा अपने अंदर छुपाए रखना चाहता था — मेरी अपनी हॉट मॉम के साथ वाली देसी हॉट सेक्स स्टोरी।
मेरी माँ का नाम रेखा है। उम्र 42 साल, लेकिन फिगर 34-28-34। 5 फुट 6 इंच लंबी, गोरी, बड़े-बड़े भरे हुए बूब्स और गोल-गोल मोटी गांड वाली। देखने वाले का लंड अपने आप खड़ा हो जाता है। वो हाउसवाइफ हैं और लखनऊ में दादा-दादी के साथ रहती हैं। पापा का 2003 में एक्सीडेंट में देहांत हो गया था। मैं उनका इकलौता बेटा हूँ। मेरी उम्र 26 साल है और मेरा लंड 7 इंच लंबा, 3 इंच मोटा है।
पिछले महीने दिवाली के मौके पर माँ मुझे मिलने लखनऊ से जयपुर आई थीं। 6 महीने बाद घर से कोई आया था, इसलिए मैं बहुत खुश था। लेकिन सच तो ये है कि मैं सालों से माँ को चोदने के सपने देख-देख कर मुठ मारता था। उनकी इस्तेमाल की पैंटी चुराकर सूंघता और कल्पना करता कि एक दिन उनकी चुत में अपना लंड घुसाऊंगा।
जैसे ही माँ आईं, मेरा लंड तुरंत खड़ा हो गया। क्या कयामत लग रही थीं! मैंने उन्हें जोर से गले लगाया। घर आकर उन्होंने फ्रेश होने के लिए नहाया। बाहर निकलीं तो क्रीम कलर की साड़ी और ब्लाउज पहने हुए थीं। ब्लाउज के अंदर सफेद ब्रा झांक रहा था। उस वक्त तो मैंने सोचा था कि अभी पकड़ के चोद दूं, लेकिन हिम्मत नहीं हुई। बस अंदर ही अंदर आग जल रही थी।
रात को खाना खाने के बाद माँ बोलीं, “सोने चलती हूँ।” मैंने कहा, “माँ, आज मेरे साथ सो सकती हो?” वो हंसकर मान गईं। हम एक ही बेड पर एक रजाई में लेट गए। ठंड काफी थी। बातें करते-करते माँ सो गईं, लेकिन मुझे नींद कहाँ आनी थी।
माँ करवट लेकर लेटी थीं। उनका एक हाथ सिर पर था और सांस के साथ उनके मोटे बूब्स ऊपर-नीचे हो रहे थे। मैं धीरे से उनके करीब सरका और अपना लंड उनकी कमर से सटाकर रख दिया। फिर धीरे से हाथ उनके पेट पर रखा। जब उन्होंने कुछ नहीं कहा तो मैंने हाथ ऊपर ले जाकर उनके बूब्स को सहलाने लगा।
जैसे ही मैंने बूब्स दबाया, माँ की आँख खुल गई। उन्होंने मेरा हाथ पकड़ लिया और बोलीं, “बेटा, ये गलत है…” लेकिन मैंने हिम्मत करके उनके ऊपर चढ़ गया और उनके होंठों को चूसने लगा। वो छटपटाईं, धक्का देने लगीं, लेकिन मैं नहीं हटा। कुछ देर बाद वो भी नरम पड़ गईं और मुझे किस करने लगीं।
10 मिनट तक गहरी फ्रेंच किसिंग के बाद मैंने उनकी साड़ी, ब्लाउज और पेटीकोट उतार दिया। माँ सिर्फ ब्रा-पैंटी में थीं। जैसे कोई अप्सरा लेटी हो। मैंने ब्रा खोलकर उनके निप्पल्स को चूसा-काटा। माँ आहें भरने लगीं — “आह… अमित… काटो बेटा… चूस लो… ह्म्म्म… जोर से…”
फिर मैंने उन्हें उल्टा कर उनकी पूरी पीठ और गांड चाटी। माँ पागल हो रही थीं। “चाट साले… अपनी रेखा की गांड चाट… आह्ह्ह… मादरचोद चाट!” मैंने उनकी पैंटी दांतों से उतारी और उनकी चुत को जोर-जोर से चाटा। माँ झड़ गईं और चिल्लाईं, “तेरे बाप ने कभी नहीं चाटा… तू चाट मादरचोद… चाट!”
उसके बाद माँ ने खुद कहा, “अब चोद अपनी माँ को… बहुत सालों से प्यासी हूँ।” मैंने अपना 7 इंच का लंड उनकी गीली चुत पर रखा और धीरे-धीरे अंदर डाल दिया। पूरी तरह घुसते ही माँ ने आह भरकर कहा, “अब चोदो मुझे… फाड़ दो अपनी माँ की चुत!”
मैंने जोर-जोर से ठुकाई शुरू कर दी। माँ चिल्ला रही थीं — “हाँ अमित… और जोर से… चोद मादरचोद… अपनी माँ को चोद… आह्ह्ह… कचूमर बना दे मेरी चुत का!” हम दोनों घंटों तक अलग-अलग पोजीशन में चुदाई करते रहे — मिशनरी, डॉगी, वो ऊपर, मैं ऊपर।
रात भर माँ कई बार झड़ीं। आखिर में मैं भी उनके अंदर ही झड़ गया। माँ ने मुझे गले लगाकर कहा, “अब ये राज हमारा रहेगा… तू मेरा चुदक्कड़ राजकुमार है और मैं तेरी चुदवाने वाली रंडी।”
उसके बाद वाली रात तो और भी खतरनाक थी। माँ खुद मेरे ऊपर चढ़ीं और जोर-जोर से कूद-कूद कर चुदाई करवाती रहीं। पूरी रात हम दोनों थके नहीं।
अब माँ हर महीने जयपुर आने का प्लान बना रही हैं। हम अब माँ-बेटा नहीं, प्रेमी बन चुके हैं। दोनों एक-दूसरे की चुत और लंड के बिना रह नहीं सकते।