दोस्तों, ये मेरी वो सच्ची घटना है जिसे मैं सालों से मन में छुपाकर रखना चाहता था। आज मैं आपको अपनी देसी हिंदी सेक्स कहानी सुनाने जा रहा हूँ — मेरी सोतेली माँ वाली हॉट कहानी।
मेरा नाम राहुल है। मैं लखनऊ का रहने वाला हूँ, लेकिन नौकरी के सिलसिले में दिल्ली में रहता हूँ। एक बड़ी कॉर्पोरेट कंपनी में काम करता हूँ।
ये कहानी मेरी सोतेली माँ सुनीता के बारे में है। उनकी उम्र 45 साल है। वो बेहद खूबसूरत, गोरी और सेक्सी हैं। उनका चेहरा इतना आकर्षक है कि देखने वाला बार-बार देखे। उनके बूब्स 34 साइज़ के गोल और भरे हुए हैं, कमर 30 इंच की है और गांड 36 साइज़ की तंबूरे जैसी गोल-मोटी है। इतना शानदार फिगर होने के बावजूद वो बहुत सीधी-सादी दिखती हैं।
पापा की दूसरी शादी सुनीता आंटी से हुई थी। पापा के गुजर जाने के बाद मैं उन्हें लखनऊ से दिल्ली ले आया। अब हम दोनों ही दिल्ली में रहते हैं।
कुछ महीने बाद की बात है। एक शाम करीब 7 बजे मेरे दो मैनेजर — शर्मा और वर्मा — मेरे फ्लैट पर जरूरी काम लेकर आए। दोनों की उम्र करीब 48-49 साल थी और दोनों हट्टे-कट्टे, तगड़े आदमी थे।
मैंने उन्हें चाय पीने को कहा। ड्रॉइंग रूम में बैठे दोनों को मैंने अपनी सोतेली माँ सुनीता से मिलवाया। माँ उस वक्त सफेद साड़ी और ब्लाउज पहने हुए थीं। चाय बनाने किचन जा रही थीं तो दोनों की नजरें उनकी मोटी गांड पर अटक गईं।
चाय लेकर जब माँ आईं तो वर्मा ने कहा, “आप भी हमारे साथ बैठकर चाय पी लीजिए।” माँ बैठ गईं। फिर बातें शुरू हुईं। दोनों मुझसे कम और माँ से ज्यादा बातें करने लगे। बातों-बातों में उन्होंने जान लिया कि पापा कब गुजर गए थे और माँ अकेली हैं।
उस शाम के बाद से ही दोनों बॉस मुझ पर सख्त हो गए। छोटी-छोटी गलतियों पर बुरी तरह डांटने लगे। कुछ दिनों में मुझे लगा कि नौकरी जा सकती है।
मैंने परेशान होकर उनसे बात करने का समय मांगा। ऑफिस के बाद उन्होंने मुझे केबिन में बुलाया और कहा — “एक शर्त पर हम तुझे नौकरी नहीं निकालेंगे।”
“क्या शर्त?” मैंने पूछा।
दोनों मुस्कुराए और बोले, “हमें तेरी सोतेली माँ चाहिए।”
मैं स्तब्ध रह गया, लेकिन नौकरी बचाने की मजबूरी में मुझे हामी भरनी पड़ी। उन्होंने कहा कि मुझे कुछ नहीं करना है, बस चुप रहना है। माँ को भी कभी पता नहीं चलना चाहिए कि मुझे सब मालूम है।
फिर असली खेल शुरू हुआ।
एक दिन दोपहर को दोनों बॉस मुझे साथ लेकर घर आए और बोले, “चुपचाप दरवाजा खोल और अंदर जाकर अपने कमरे में छुप जा।”
मैंने वैसा ही किया। माँ दोपहर में सो रही थीं। उनके बदन पर सिर्फ साड़ी थी, ब्लाउज नहीं पहना था। इसलिए उनकी गोरी पीठ और बूब्स आधे खुले दिख रहे थे।
दोनों ने अपने सारे कपड़े उतार दिए। शर्मा माँ के एक तरफ लेट गए और धीरे-धीरे साड़ी हटाकर उनके बूब्स सहलाने लगे। वर्मा ने मोबाइल निकालकर माँ की बहुत सारी नंगी फोटो खींच लीं।
अचानक दोनों ने माँ को जकड़ लिया। माँ की नींद खुली और वो घबरा गईं। छुड़ाने की कोशिश करने लगीं, लेकिन दोनों बहुत तगड़े थे।
एक ने उनका मुंह दबाया और दूसरे ने कहा, “तेरी नंगी फोटो हमने खींच रखी हैं। अगर नेट पर डाल दीं तो तू रंडी बन जाएगी और तेरे बेटे की नौकरी चली जाएगी।”
माँ डर के मारे रोने लगीं। फिर उन्होंने माँ को समझाया, “चुप हो जा… तेरी चूत को भी तो लंड चाहिए। हम तुझे रोज चोदेंगे, तुझे मजा आएगा।”
फिर दोनों ने माँ की साड़ी और पेटीकोट उतार दिए। पहली बार मैंने अपनी सोतेली माँ को पूरी तरह नंगी देखा — गोरी त्वचा, बड़े बूब्स, गहरी नाभि, हल्के बालों वाली चूत और मोटी गांड। मेरा लंड भी खड़ा हो गया।
दोनों ने माँ को जंगली जानवरों की तरह मसलना शुरू कर दिया। वर्मा माँ की चूत चाटने लगा और शर्मा उनके बूब्स चूसने-काटने लगा। माँ के मुंह से “आह… अह्ह…” की आवाजें निकलने लगीं।
फिर दोनों ने माँ को बारी-बारी से चोदा। शर्मा ने पहले उनकी चूत में लंड डाला, वर्मा ने मुंह में। बाद में दोनों ने माँ की गांड भी चोदी। माँ शुरुआत में रो रही थीं, लेकिन बाद में पूरी तरह चुदक्कड़ बन गईं और चीख-चीख कर कहने लगीं — “और चोदो… जोर से चोदो… आह्ह्ह… फाड़ दो मेरी चूत…”
दोनों ने माँ की चूत और मुंह में अपना माल झाड़ दिया।
चुदाई के बाद उन्होंने मुझे बाहर बुलाया। मैंने झूठ नहीं बोला — “हाँ, अच्छा लगा।”
उसके बाद से लगभग रोज माँ उन दोनों से बुरी तरह चुदवाती हैं। माँ अब उनकी रखैल बन गई हैं। दोनों माँ को बाहर घुमाने भी ले जाते हैं। जब माँ घर लौटती हैं तो पूरी तरह थकी, चुदाई से लाल-लाल चूत और गांड लेकर आती हैं।
अब घर में रोज चुदाई का माहौल है। माँ दोनों के नाम का सिंदूर लगाती हैं और खुशी-खुशी उनकी लंड लेती हैं।
मेरी सोतेली माँ की चूत ने मेरी नौकरी बचा ली। और अब वो पूरी तरह चुदक्कड़ बन चुकी हैं।