यह मेरी एक ऐसी सच्ची घटना है जिसे मैं हमेशा छुपाकर रखना चाहती थी, लेकिन आज दिल कर रहा है कि सबको बता दूं। यह xxx भाभी चुदाई कहानी है जो मेरी जिंदगी का सबसे गर्म हिस्सा बन गई। मेरा नाम प्रिया है और मेरी उम्र 32 साल है। मैं एक आम घरेलू औरत हूं, फिगर सामान्य लेकिन मेरी चूचियां इतनी भरी-भरी हैं कि देवर जी उन्हें देखते ही मसलने की सोचते हैं। मेरे दो बच्चे हैं, एक बेटा और एक बेटी। देवर जी की उम्र 35 साल है, गांव में रहते हैं लेकिन शहर आते रहते हैं और हर बार मेरे साथ छेड़छाड़ करके मजे लेते हैं।
कुछ दिन पहले देवर जी दोपहर करीब 1 बजे हमारे घर पहुंचे। मैं उन्हें देखकर बहुत खुश हो गई। उस समय घर में सिर्फ मैं और मेरी बेटी थी, बेटी की तबीयत खराब थी इसलिए स्कूल नहीं गई थी, बेटा स्कूल गया हुआ था। मैंने जल्दी से देवर जी के लिए खाना बनाया। उन्होंने नहाकर खाना खाया तो मैंने उनके लिए जमीन पर बिस्तर बिछा दिया क्योंकि वो थके हुए थे और आराम करना चाहते थे। हमारे घर में एक ही कमरा है और किचन अलग। मैंने देवर जी का बिस्तर नीचे लगाया, बेटी ऊपर पलंग पर सो रही थी, टीवी चल रहा था। मैं भी उनके पास जमीन पर बैठकर टीवी देखने लगी।
देवर जी थके होने के बावजूद मुझे पास खींचकर अपनी हरकतें शुरू कर दीं। कभी मेरी कमर सहलाते, कभी पेट पर हाथ फेरते, कभी चूचियों को दबा देते। मैं कसमसा जाती और फुसफुसाती कि बेटी अभी सोई नहीं है, लेकिन वो रुकते नहीं। उनकी उंगलियां मेरी जांघों पर घूमने लगीं। मैं भी अंदर से गर्म हो रही थी। शाम ढलने लगी तो मैं किचन में काम करने चली गई। देवर जी भी मेरे पीछे-पीछे आए और पैरों से मेरे चूतड़ों को सहलाने लगे। तभी मेरे पति आ गए, उन्होंने मुझे पैसे दिए और चिकन लाने को कहा। मैंने देवर जी से कहा साथ चलो, हम बाजार गए। वापस आकर मैं चिकन बना रही थी तो वो फिर मेरे पास बैठकर हाथ-पैरों से मस्ती करने लगे।
उन दिनों मेरे पास कोई कमाई का साधन नहीं था इसलिए पैसे कमाने के लिए मैं 55 Game खेला करती थी। मैंने इस लिंक से ज्वाइन किया था, जॉइन करते ही पहले 100 रुपए डिपॉजिट पर मुझे 500 रुपए एक्स्ट्रा मिले और मैं 600 रुपए आसानी से निकाल लिया करती थी। आज भी मैं यही गेम खेलती हूं अपनी सीक्रेट ट्रिक की वजह से। रात हुई, मैंने सबको खाना खिलाया। पति नशे में थे, खाना खाए बिना देवर जी के पास सो गए। मैं बच्चों को लेकर पलंग पर सो गई, लाइट बुझा दी क्योंकि देवर जी को अंधेरे में नींद आती है।

रात में मुझे पेट पर हाथ महसूस हुआ। समझ गई देवर जी हैं। मैं चुप रही। उनका हाथ धीरे-धीरे मेरी चूचियों तक पहुंचा। ब्लाउज के ऊपर से मसलने लगे। मेरी सिसकियां निकलने लगीं। उन्होंने होंठ मेरे होंठों पर रखे और चूसने लगे। फिर ब्लाउज के हुक खोल दिए, नंगी चूचियां मसलने लगे। साड़ी ऊपर की, चूत सहलाने लगे। उंगली अंदर डालकर चुदाई जैसा करने लगे। मैं सातवें आसमान पर थी। तभी पति की करवट बदली, मैंने उनका हाथ हटा दिया, कपड़े ठीक किए, बच्चों को सामने किया और दीवार की तरफ मुंह करके सो गई। लेकिन कुछ देर बाद फिर शुरू हो गए।
मैं उन्हें रोकती रही क्योंकि डर लग रहा था और नींद भी आ रही थी। आखिर वो नाराज होकर सो गए। सुबह पति ड्यूटी पर चले गए, बेटा ट्यूशन गया। बेटी सो रही थी। मैंने देवर जी को जगाया तो वो नाराज थे, बात नहीं कर रहे थे। मैं समझ गई। बेटी को बाहर भेजा, फिर मैंने प्यार से उनकी पीठ सहलाई, गाल पर चुम्मी दी। वो बोले अब कभी नहीं आऊंगा। मैंने मनाया कि दोपहर में सब कुछ करने दूंगी। सुनते ही उन्होंने मुझे जकड़ लिया, चूचियां जोर से मसलीं, किस किया। फिर फ्रेश हुए। उस दिन बेटा स्कूल नहीं गया, दोपहर बाहर खेलने चला गया, बेटी पड़ोस में टीवी देखने चली गई।
कमरा खाली हो गया। देवर जी पलंग पर लेटे थे। मैं उनके पास गई। उन्होंने मुझे खींचकर अपनी गोद में बिठा लिया। मेरी साड़ी ऊपर की, ब्लाउज खोला। मेरी चूचियां बाहर आईं। उन्होंने जोर से चूसीं, निप्पल काटे। मैं आह्ह्ह कर रही थी। उनकी पैंट खोली, उनका लंड बाहर निकाला। बहुत खड़ा था, मोटा, लंबा। मैंने हाथ में पकड़ा, सहलाया। वो बोले चूस इसे। मैं घुटनों पर बैठी, लौड़ा मुंह में लिया। चूसने लगी। ग्ग्ग्ग… गोंग… उनकी सांसें तेज। मैं जोर-जोर से चूस रही थी।
फिर उन्होंने मुझे पलंग पर लिटाया। साड़ी पूरी ऊपर की, पैंटी उतारी। मेरी चूत गीली हो चुकी थी। उन्होंने जीभ से चाटना शुरू किया। क्लिट पर जीभ घुमाई। मैं कमर उठा रही थी। आह्ह्ह… देवर जी… और चाटो। उन्होंने उंगलियां डालीं, अंदर-बाहर किया। चपचप की आवाज आई। मैं झड़ने लगी। रस निकला। उन्होंने चाट लिया। फिर अपना लंड मेरी चूत पर रगड़ा। धीरे से धक्का मारा। टोपा अंदर गया। मैं चीखी, आह्ह्ह… बहुत मोटा है। उन्होंने पूरा धक्का मारा। लंड अंदर चला गया। मैंने उनकी कमर पकड़ी।
वो जोर-जोर से चोदने लगे। ठपठप… ठपठप… मेरी चूत में लंड अंदर-बाहर। मैं चिल्ला रही थी, हां देवर जी… चोदो मुझे… जोर से… चुदाई करो। वो मेरी चूचियां दबाते, निप्पल चूसते। मैं उनकी पीठ नाखूनों से खरोंच रही थी। स्पीड बढ़ी। चपचप चपचप। मैं कई बार झड़ी। वो रुके नहीं। फिर उन्होंने मुझे घोड़ी बनाया। पीछे से लंड डाला। गांड पर थप्पड़ मारे। जोर-जोर से पेलते रहे। मैं चीख रही थी, आह्ह्ह… फाड़ दो मेरी चूत… चोदते रहो।
लंबी चुदाई हुई। आखिर वो बोले निकाल रहा हूं। मैंने कहा अंदर ही डालो। उन्होंने जोर से धक्का मारा और वीर्य अंदर छोड़ दिया। गर्म वीर्य महसूस हुआ। हम दोनों हांफ रहे थे। लंड निकाला तो चूत से वीर्य बह रहा था। मैंने उसे चाटा। फिर हम लेट गए। देवर जी बोले आज बहुत मजा आया। मैं मुस्कुराई।
उसके बाद हर बार जब देवर जी आते हैं, हम ऐसी ही चुदाई करते हैं। कभी किचन में, कभी बाथरूम में। पति को शक नहीं हुआ। बच्चे बाहर रहते हैं। अब यह हमारा राज है। देवर जी का खड़ा लंड मेरी चूत पर चोट मारता है और मैं हर बार चुदक्कड़ बन जाती हूं।
यह मेरी असली कहानी है। क्या आपको लगता है मैंने सही किया? कृपया अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं। अगर आपकी भी ऐसी कोई अनोखी अनुभव है तो शेयर करें।